Sugar prices have dropped by up to 19%, yet it is still selling at a high price! आखिर फायदा किसे मिल रहा है?
नई दिल्ली:देशभर में चीनी की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है, लेकिन इसका फायदा आम उपभोक्ताओं तक नहीं पहुंच रहा। सहकारी चीनी मिलों के महासंघ ने दावा किया है कि मिलों से सस्ती चीनी निकलने के बावजूद बाजार में ऊंचे दाम वसूले जा रहे हैं, जिसके लिए बिचौलियों को जिम्मेदार ठहराया गया है।

महासंघ के अध्यक्ष हर्षवर्धन पाटिल ने बताया कि पिछले कुछ दिनों में फैक्ट्री गेट पर चीनी के दाम करीब 18 से 19 प्रतिशत तक घटे हैं। फिलहाल मिलों से चीनी 45 से 46 रुपये प्रति किलो के भाव पर बेची जा रही है।
उन्होंने कहा कि परिवहन और अन्य खर्च जोड़ने के बाद भी उपभोक्ताओं को चीनी करीब 50 रुपये प्रति किलो तक मिलनी चाहिए। लेकिन बाजार में खुदरा कीमतें 62 रुपये प्रति किलो के आसपास बनी हुई हैं। ऐसे में साफ है कि मिलों और ग्राहकों के बीच मौजूद बिचौलिये अतिरिक्त मुनाफा कमा रहे हैं।

उपभोक्ता मामलों के विभाग के आंकड़ों के अनुसार, देश में चीनी की औसत थोक कीमत 58 रुपये और खुदरा कीमत 62 रुपये प्रति किलो है।
इस दौरान हर्षवर्धन पाटिल ने एथेनॉल उत्पादन को लेकर सरकार की नीति का भी समर्थन किया। उन्होंने कहा कि देश में चीनी की कोई कमी नहीं है और कमी का माहौल कृत्रिम रूप से बनाया गया था।
गौरतलब है कि हाल ही में सरकार की जांच में कुछ चीनी मिलों के पास घोषित स्टॉक से अधिक चीनी मिलने के मामले सामने आए थे। वहीं, केंद्र सरकार ने 28 अगस्त को भी स्पष्ट किया था कि देश में चीनी की पर्याप्त उपलब्धता है और किसी तरह की कमी नहीं है।
रिपोर्टिंग – विरेन्द्र

