जयपुर: एंटी-पेपर लीक बिल पर बोले अशोक गहलोत, कहा- “यह सिर्फ फेस-सेविंग की कोशिश”
जयपुर: पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राजस्थान विधानसभा में पारित एंटी-पेपर लीक बिल पर सवाल उठाते हुए इसे सरकार की “फेस-सेविंग” बताया। उन्होंने कहा कि सरकार ने चुनावी वादे को निभाने के लिए बिल तो ले आई, लेकिन यदि इसे विपक्ष और विशेषज्ञों से सलाह लेकर तैयार किया जाता तो यह और प्रभावी हो सकता था। गहलोत ने कहा कि उनकी सरकार पहले ही पेपर लीक मामलों में आजीवन कारावास, 10 करोड़ रुपये तक जुर्माना और आरोपियों की संपत्ति जब्त करने जैसे कड़े प्रावधान लागू कर चुकी थी। उनके अनुसार, केवल सजा बढ़ाने से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि परीक्षा प्रणाली और उसके प्रबंधन को मजबूत करना सबसे जरूरी है।
उन्होंने दावा किया कि पेपर लीक केवल राजस्थान की समस्या नहीं है, बल्कि देशभर में यह गंभीर चुनौती बन चुकी है। गुजरात, उत्तर प्रदेश, बिहार सहित कई राज्यों और विभिन्न संस्थानों में भी पेपर लीक के मामले सामने आए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव के दौरान राजस्थान को बदनाम करने के लिए इस मुद्दे को राजनीतिक रूप से उछाला गया।
गहलोत ने कहा कि उनकी सरकार ने परीक्षा प्रक्रिया में बदलाव कर व्यवस्था को मजबूत किया था, जिसका असर बाद में भी देखने को मिला। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार उन सुधारों का श्रेय लेने की कोशिश कर रही है, जबकि भर्ती प्रक्रियाएं अब भी अटकी हुई हैं और युवाओं को समय पर नौकरियां नहीं मिल रही हैं। राज्य सरकार के कामकाज पर टिप्पणी करते हुए गहलोत ने कहा कि आज हर गांव और हर घर में सरकार की चर्चा हो रही है। उन्होंने मुख्यमंत्री से सुशासन देने की अपील करते हुए कहा कि जनता का हित सर्वोपरि होना चाहिए।
उन्होंने कहा, “हम चाहते हैं कि सरकार पांच साल अच्छे से काम करे। यदि सुशासन मिलेगा तो जनता को फायदा होगा, लेकिन यदि कुशासन जारी रहा तो नुकसान केवल प्रदेश की जनता का होगा।”


