राजस्थान निकाय चुनाव में सियासी घमासान तेज, टिकट बंटवारे के बाद बागियों ने बढ़ाई पार्टियों की चिंता
जयपुर। राजस्थान में निकाय चुनाव को लेकर राजनीतिक माहौल लगातार गर्म होता जा रहा है। नामांकन वापसी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब चुनावी मैदान में उतरने वाले उम्मीदवारों की स्थिति काफी हद तक स्पष्ट हो गई है। भाजपा और कांग्रेस समेत अलग-अलग राजनीतिक दलों के प्रत्याशी अब मतदाताओं के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने में जुट गए हैं। वहीं टिकट वितरण के बाद सामने आई नाराजगी ने दोनों प्रमुख दलों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।

टिकट कटने से कई जगह नाराजगी
निकाय चुनाव में टिकट नहीं मिलने से कुछ कार्यकर्ताओं और नेताओं में असंतोष देखने को मिला है। जोधपुर में भाजपा से टिकट नहीं मिलने पर एक कार्यकर्ता के भावुक होने का मामला भी सामने आया। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि स्थानीय स्तर पर टिकट की राजनीति कितनी महत्वपूर्ण हो गई है।
वहीं कांग्रेस ने भी पार्टी के अधिकृत प्रत्याशियों के खिलाफ चुनाव मैदान में उतरने वाले कुछ नेताओं पर कार्रवाई शुरू कर दी है। बीकानेर में पूर्व पार्षद दीपक अरोड़ा और मोहित अरोड़ा को पार्टी से छह साल के लिए निलंबित किए जाने की खबर सामने आई है।
नामांकन वापस लेने के अंतिम दिन बाड़मेर के एसडीएम कार्यालय में भाजपा और राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के कार्यकर्ताओं के बीच विवाद की स्थिति बन गई। नामांकन वापसी को लेकर शुरू हुआ विवाद बाद में आपसी झड़प तक पहुंच गया। इस घटना ने चुनावी माहौल में बढ़ते तनाव को उजागर किया है।
कांग्रेस और भाजपा के सामने बड़ी चुनौती
निकाय चुनावों में स्थानीय मुद्दे हमेशा महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। सड़क, सफाई, पेयजल, सीवरेज, स्ट्रीट लाइट और शहरों के विकास जैसे मुद्दे सीधे आम जनता से जुड़े हैं। ऐसे में राजनीतिक दलों के लिए केवल बड़े नेताओं के नाम पर चुनाव जीतना आसान नहीं होगा।
टिकट वितरण के बाद सामने आए असंतोष को नियंत्रित करना भी पार्टियों के लिए बड़ी चुनौती है। बागी उम्मीदवार यदि मजबूत स्थिति में रहते हैं तो इसका सीधा असर अधिकृत प्रत्याशियों के वोट बैंक पर पड़ सकता है।

नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब राजनीतिक दलों का पूरा ध्यान चुनाव प्रचार पर रहने वाला है। प्रत्याशी घर-घर संपर्क, छोटी सभाओं और स्थानीय मुद्दों के जरिए मतदाताओं को अपने पक्ष में करने की कोशिश करेंगे।
राजस्थान के निकाय चुनाव इसलिए भी महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं क्योंकि इनके नतीजे प्रदेश की स्थानीय राजनीति में जनता के रुझान का संकेत दे सकते हैं। आने वाले दिनों में प्रचार अभियान तेज होने के साथ-साथ नेताओं के बीच आरोप-प्रत्यारोप भी बढ़ने की संभावना है।
REPORTING ; MOTI JANGID

