The message of vulture conservation resonated in Bikaner.250 विशेषज्ञों ने पर्यावरण बचाने का दिया मंत्र
बीकानेर,पर्यावरण संरक्षण और जैव विविधता को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच राजकीय डूंगर कॉलेज, बीकानेर के प्राणिशास्त्र विभाग द्वारा आयोजित “गिद्ध संरक्षण एवं पर्यावरण” विषयक राष्ट्रीय सेमिनार में देश-विदेश से आए करीब 250 विशेषज्ञों, वैज्ञानिकों और शोधार्थियों ने भाग लिया। सेमिनार में गिद्धों की घटती आबादी, संरक्षण की चुनौतियों और उनके अस्तित्व को बचाने के लिए आवश्यक उपायों पर गंभीर चर्चा हुई।

कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। उद्घाटन सत्र में महाराजा गंगा सिंह विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. अखिल रंजन, विभागाध्यक्ष डॉ. प्रताप सिंह, डॉ. पंकज गोस्वामी तथा प्राचार्य डॉ. राजेन्द्र पुरोहित मौजूद रहे।
आयोजन सचिव डॉ. आनंद कुमार ने कहा कि गिद्ध केवल एक पक्षी नहीं, बल्कि प्रकृति की सफाई व्यवस्था की मजबूत कड़ी हैं। उन्होंने बताया कि मृत पशुओं का शीघ्र निस्तारण कर गिद्ध कई घातक बीमारियों के प्रसार को रोकने में अहम भूमिका निभाते हैं।
प्राणिशास्त्र विभागाध्यक्ष डॉ. प्रताप सिंह ने पश्चिमी राजस्थान, विशेषकर जोड़बीड़ क्षेत्र में गिद्धों की वर्तमान स्थिति और संरक्षण प्रयासों की जानकारी दी। वहीं प्राचार्य डॉ. राजेन्द्र पुरोहित ने गिद्धों को प्रकृति का सबसे महत्वपूर्ण सफाईकर्मी बताते हुए कहा कि पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने में उनकी भूमिका बेहद अहम है।

विशेषज्ञों ने साझा किए संरक्षण के सफल मॉडल
तकनीकी सत्रों में बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी (BNHS) के सचिन रानडे ने कैप्टिव ब्रीडिंग के माध्यम से गिद्धों की संख्या बढ़ाने के सफल प्रयासों की जानकारी दी। प्रो. अनिल छंगाणी ने भारत में गिद्ध संरक्षण की वर्तमान स्थिति और भविष्य की संभावनाओं पर प्रकाश डाला, जबकि हेमंत वाजपेयी ने पिंजौर स्थित गिद्ध संरक्षण एवं प्रजनन केंद्र के अनुभव साझा किए।
प्लास्टिक प्रदूषण पर दिखाई गई जागरूकता फिल्म
सेमिनार के दौरान शोधार्थी अदनान द्वारा तैयार प्लास्टिक प्रदूषण पर आधारित लघु फिल्म का प्रदर्शन किया गया। फिल्म में प्लास्टिक कचरे से गायों और गिद्धों के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों को प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत किया गया। फिल्म ने पर्यावरण संरक्षण और प्लास्टिक मुक्त वातावरण का संदेश दिया, जिसकी प्रतिभागियों ने सराहना की।कार्यक्रम का संचालन डॉ. बलराम सांई ने किया तथा अंत में डॉ. अर्चना पुरोहित ने सभी अतिथियों, विशेषज्ञों एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
रिपोर्टिंग – विरेन्द्र

