प्रदेश के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी, शिक्षा व्यवस्था डगमगा रही: प्रधानाचार्यों ने शिक्षा मंत्री से की मांग
प्रदेशभर के प्रधानाचार्य-प्रधानाध्यापकों ने जताई चिंता। बोले- जहां 3 व्याख्याताओं के पद स्वीकृत हैं वहां एक भी नहीं, बोर्ड कक्षाओं का भविष्य दांव पर
जयपुर। प्रदेश के सरकारी स्कूलों में अध्यापकों और व्याख्याताओं की भारी कमी के कारण शिक्षा व्यवस्था चरमरा गई है। प्रदेशभर के
सरकारी स्कूलों के प्रधानाचार्य एवं प्रधानाध्यापकों ने शिक्षा मंत्री से तत्काल हस्तक्षेप कर रिक्त पदों को भरने की मांग को लेकर गुहार लगाई है।प्रधानाचार्यों का कहना है कि कई विद्यालयों में छात्रों की संख्या सैकड़ों में है, लेकिन पढ़ाने के लिए पर्याप्त स्टाफ ही उपलब्ध नहीं है। “स्वीकृत पद खाली, बच्चे बिना शिक्षक के” प्रधानाचार्यों ने बताया कि कई उच्च माध्यमिक विद्यालयों में सरकार द्वारा 3 व्याख्याताओं की पोस्ट स्वीकृत हैं। लेकिन हकीकत यह है कि वहां एक भी व्याख्याता पदस्थ नहीं है। विज्ञान, वाणिज्य और कला तीनों संकाय प्रभावित हो रहे हैं। ऐसे में बोर्ड कक्षाओं के बच्चों का भविष्य अंधकार में है। कई सामाजिक संगठनों एवं प्रतिनिधियों ने मांग की कि जिन स्कूलों में स्टाफ बिल्कुल नहीं है, वहां कम से कम 1-2 व्याख्याता तो तुरंत लगाए जाएं ताकि पढ़ाई सुचारू रूप से चल सके। इसी तरह प्राथमिक और माध्यमिक स्तर पर भी अध्यापक/अध्यापिकाओं के रिक्त पदों को भरा जाए।
शिक्षा की गुणवत्ता पर असर प्रधानाचार्यों ने कहा कि शिक्षकों की कमी के कारण एक ही शिक्षक को 3-4 विषय पढ़ाने पड़ रहे हैं। इससे न तो बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल पा रही है और न ही शिक्षक अपना 100% दे पा रहे हैं। अतिरिक्त कार्य, चुनाव ड्यूटी और अन्य कामों का बोझ पहले से ही है।

प्रदेशभर के प्रधानाचार्य/प्रधानाध्यापकों ने शिक्षा मंत्री से मांग की है कि: रिक्त चल रहे व्याख्याता, वरिष्ठ अध्यापक और तृतीय श्रेणी शिक्षकों के पदों पर तुरंत भर्ती/पदस्थापन किया जाए। जिन स्कूलों में 3 पद स्वीकृत हैं और 1 भी नहीं है, वहां प्राथमिकता के आधार पर कम से कम 1-2 व्याख्याता लगाए जाएं। अतिथि शिक्षकों की व्यवस्था कर तत्काल राहत दी जाए।प्रधानाचार्यों ने उम्मीद जताई है कि शिक्षा मंत्री इस गंभीर समस्या को समझते हुए जल्द समाधान करेंगे, ताकि “शिक्षा के मंदिर” में पढ़ाई बिना रुकावट चल सके।

