बीकानेर में कांग्रेस जिलाध्यक्ष से मार*पीट, पुलिस ने चार आरो*पियों को दबोचा
राजस्थान के बीकानेर से एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जिसने कांग्रेस पार्टी के भीतर की गुटबाजी को खुलकर उजागर कर दिया है। कांग्रेस शहर जिलाध्यक्ष और पूर्व IPS अधिकारी मदन गोपाल मेघवाल के साथ बुधवार को बुरी तरह मार*पीट की गई। यह पूरी घटना उस वक्त हुई जब मेघवाल वार्ड नंबर 50 से कांग्रेस प्रत्याशी नवरतन डागा के चुनाव कार्यालय के उद्घाटन कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे थे।

कैसे हुई मार*पीट
जानकारी के मुताबिक, आरोपियों ने पहले मेघवाल को बातचीत करने और माला पहनाने के बहाने कार्यालय से बाहर बुलाया। जैसे ही वे सीढ़ियों से नीचे उतरे, चार युवकों ने उन्हें अचानक घेर लिया और उनके साथ चांटे-मुक्कों से मार*पीट शुरू कर दी। घटना इतनी तेजी से हुई कि आसपास मौजूद लोग कुछ समझ पाते, उससे पहले ही आरो*पी मौके से फरार हो गए।
इस पूरे विवाद की जड़ में टिकट न मिलने की नाराज़गी बताई जा रही है। आरोप है कि हमलावर खुद कांग्रेस पार्टी के ही कार्यकर्ता थे, जो वार्ड 50 से टिकट न मिलने से खफा थे। मामला यहीं तक सीमित नहीं रहा — पुलिस पूछताछ के दौरान एक आरोपी ने यह भी दावा किया कि उसके पास “टिकट चोरी” से जुड़े सबूत मौजूद हैं, जिससे मामला और उलझता नज़र आ रहा है।
पुलिस ने की त्वरित कार्रवाई
घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस तुरंत हरकत में आई और चारों आरो*पियों को हिरासत में ले लिया। फिलहाल मामले की गहनता से जांच की जा रही है और पुलिस आगे की पूछताछ में जुटी है, ताकि पूरी घटना के पीछे की सच्चाई सामने आ सके।
इस घटना को पार्टी ने बेहद गंभीरता से लिया है। कां*ग्रेस ने दो पूर्व पार्षदों, दीपक अरोड़ा और मोहित अरोड़ा को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से तत्काल प्रभाव से छह साल के लिए निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई साफ संकेत देती है कि पार्टी इस मामले को हल्के में नहीं ले रही।

सियासी माहौल हुआ गरम
इस घटना ने राजनीतिक हलचल भी पैदा कर दी है। भाजपा ने इस मौके पर कांग्रेस को घेरते हुए आरोप लगाया कि यह घटना पार्टी के दलित नेताओं के प्रति रवैये को उजागर करती है। वहीं दूसरी ओर, कांग्रेस के भीतर वार्ड 50 की टिकट को लेकर पहले से चल रही आंतरिक गुटबाजी अब पूरी तरह खुलकर सामने आ गई है।
यह मामला सिर्फ एक मारपीट की घटना भर नहीं है, बल्कि निकाय चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस के भीतर टिकट बंटवारे को लेकर बढ़ते असंतोष की एक झलक भी है। अब देखना यह होगा कि पुलिस जांच में क्या नए तथ्य सामने आते हैं, और पार्टी अपनी इस अंदरूनी कलह को किस तरह संभालती है।
REPORTING ; MOTI JANGID

