नई दिल्ली में ग्लोबल ड्राईलैंड कांग्रेस 2026 शुरू, 800 से ज्यादा विशेषज्ञ करेंगे सूखे क्षेत्रों की खेती पर मंथन!
नई दिल्ली: देश की राजधानी नई दिल्ली में आज से तीन दिवसीय ग्लोबल ड्राईलैंड कांग्रेस 2026 की शुरुआत हो गई है। यह अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन 10 से 12 सितंबर तक आयोजित किया जा रहा है। कार्यक्रम में दुनिया के अलग-अलग हिस्सों से कृषि वैज्ञानिक, नीति-निर्माता, किसान प्रतिनिधि और विकास क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञ शामिल हो रहे हैं।
इस वर्ष कांग्रेस की मुख्य थीम ‘दक्षिण-दक्षिण सहयोग के जरिए ड्राईलैंड कृषि में बदलाव’ रखी गई है। सम्मेलन का उद्देश्य ऐसे क्षेत्रों में कृषि को अधिक टिकाऊ और जलवायु-अनुकूल बनाने के उपायों पर चर्चा करना है, जहां कम बारिश, पानी की कमी और भूमि की गुणवत्ता में गिरावट जैसी समस्याएं लगातार चुनौती बनी हुई हैं।

800 से ज्यादा विशेषज्ञ ले रहे हिस्सा
ग्लोबल ड्राईलैंड कांग्रेस में एशिया, अफ्रीका और अमेरिका सहित विभिन्न क्षेत्रों से 800 से अधिक विशेषज्ञों के शामिल होने की उम्मीद है। तीन दिनों तक चलने वाले कार्यक्रम में वैज्ञानिकों के साथ नीति-निर्माता, किसान संगठनों के प्रतिनिधि और कृषि विकास से जुड़े संस्थानों के प्रतिनिधि भी अपने अनुभव साझा करेंगे।
सम्मेलन में पैनल चर्चा, मुख्य व्याख्यान, तकनीकी सत्र और पोस्टर प्रदर्शनी जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इन सत्रों में सूखे और अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में खेती को बेहतर बनाने के लिए नई तकनीक, अनुसंधान और नीतिगत उपायों पर विचार किया जाएगा।
छह प्रमुख विषयों पर रहेगा फोकस
कांग्रेस में ड्राईलैंड कृषि से जुड़े छह प्रमुख क्षेत्रों को विशेष महत्व दिया गया है। इनमें फसल प्रजनन, जलवायु अनुकूलता, पोषण एवं बाजार, कृषि प्रणालियां, बीज प्रणाली तथा महिलाओं और युवाओं की भागीदारी शामिल है।
विशेषज्ञ इस बात पर चर्चा करेंगे कि बदलते मौसम और बढ़ते जल संकट के बीच किसानों की उत्पादकता और आय को किस तरह बनाए रखा जा सकता है। साथ ही ऐसी कृषि तकनीकों और फसल किस्मों पर भी विचार होगा, जो कम पानी वाले क्षेत्रों में बेहतर प्रदर्शन कर सकें।

दुनिया की करीब 45 प्रतिशत भूमि ड्राईलैंड
ड्राईलैंड का मुद्दा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि दुनिया की लगभग 45 प्रतिशत भूमि शुष्क या ड्राईलैंड क्षेत्रों में आती है। इन क्षेत्रों में दो अरब से अधिक लोग रहते हैं और बड़ी संख्या में लोग कृषि तथा उससे जुड़े रोजगार पर निर्भर हैं।
जलवायु परिवर्तन के कारण इन इलाकों में बारिश के पैटर्न में बदलाव, लंबे सूखे, पानी की उपलब्धता में कमी और भूमि क्षरण जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं। ऐसे में टिकाऊ खेती के तरीकों को बढ़ावा देना किसानों और खाद्य सुरक्षा दोनों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इस अंतरराष्ट्रीय कांग्रेस का आयोजन भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) और इंटरनेशनल क्रॉप्स रिसर्च इंस्टीट्यूट फॉर द सेमी-एरिड ट्रॉपिक्स (ICRISAT) द्वारा संयुक्त रूप से किया जा रहा है।यह आयोजन दोनों संस्थानों के बीच लंबे समय से चले आ रहे सहयोग के 50 वर्ष पूरे होने के अवसर से भी जुड़ा है। इस दौरान ड्राईलैंड कृषि के क्षेत्र में हुए अनुसंधान, उपलब्धियों और भविष्य की संभावनाओं पर भी चर्चा होगी।

कांग्रेस के अंतिम दिन संयुक्त राष्ट्र के दक्षिण-दक्षिण सहयोग दिवस के अवसर पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इसमें विकासशील देशों के बीच कृषि अनुसंधान, तकनीक और ज्ञान साझा करने को बढ़ावा देने पर चर्चा होगी।
इसके अलावा कृषि अनुसंधान के क्षेत्र में South-South and Triangular Cooperation (SSTC) को मजबूत करने के लिए भी विशेष सत्र होंगे।
दिल्ली डिक्लेरेशन पर हो सकता है बड़ा फैसला
तीन दिवसीय सम्मेलन के अंत में ‘Delhi Declaration on Dryland’ (3D) को अपनाए जाने की योजना है। इसके साथ ही ड्राईलैंड कृषि के क्षेत्र में नए सहयोग, समझौता ज्ञापन (MoU) और महत्वपूर्ण साझेदारियों की घोषणा भी की जा सकती है।
इससे आने वाले समय में सूखे और अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में कृषि अनुसंधान, तकनीकी सहयोग और किसानों के लिए नई रणनीतियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
भारत के लिए यह कांग्रेस इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि देश के कई हिस्सों में किसान बारिश की अनिश्चितता, भूजल स्तर में गिरावट और भूमि क्षरण जैसी चुनौतियों का सामना करते हैं। ऐसे में कम पानी में अधिक उत्पादन, जल संरक्षण, बेहतर बीज और जलवायु-अनुकूल खेती से जुड़ी तकनीकों का विस्तार किसानों के लिए काफी उपयोगी हो सकता है।ग्लोबल ड्राईलैंड कांग्रेस 2026 में होने वाली चर्चाओं और संभावित घोषणाओं से भारत सहित अन्य विकासशील देशों में ड्राईलैंड कृषि के लिए नई दिशा तय होने की उम्मीद है।
REPORTING ;MOTI JANGID

