दिल्ली में शुरू हुआ बड़ा अंतरराष्ट्रीय आयोजन, सुरक्षा से लेकर ट्रैफिक तक कड़े इंतजाम
नई दिल्ली: भारत की राजधानी नई दिल्ली इन दिनों एक बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजन की मेजबानी कर रही है। BRICS Summit 2026 को लेकर दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था को काफी मजबूत किया गया है। दुनिया के कई प्रमुख देशों के नेता इस सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए राजधानी पहुंच रहे हैं। सम्मेलन का मुख्य आयोजन भारत मंडपम में किया जा रहा है।

BRICS देशों के बीच आर्थिक सहयोग, वैश्विक राजनीति, व्यापार और अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है। इस बार का सम्मेलन ऐसे समय में हो रहा है, जब दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में भू-राजनीतिक तनाव बढ़ा हुआ है। रूस-यूक्रेन संघर्ष, पश्चिम एशिया की स्थिति और वैश्विक व्यापार जैसे मुद्दे भी चर्चा के केंद्र में रह सकते हैं।
दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी
सम्मेलन को देखते हुए दिल्ली के कई हिस्सों में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। रिपोर्टों के अनुसार, बड़ी संख्या में दिल्ली पुलिस के जवानों के साथ अर्धसैनिक बलों की कंपनियां भी तैनात की गई हैं। निगरानी के लिए सैकड़ों CCTV कैमरों का इस्तेमाल किया जा रहा है और संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा एजेंसियां लगातार नजर बनाए हुए हैं।
VVIP मूवमेंट के कारण राजधानी की कई प्रमुख सड़कों पर ट्रैफिक व्यवस्था में बदलाव किया गया है। यात्रियों को कुछ मार्गों से बचने और अपने सफर के लिए अतिरिक्त समय रखने की सलाह दी गई है। खासकर मध्य और दक्षिण दिल्ली के कई इलाकों में ट्रैफिक प्रभावित होने की संभावना है।
कई इलाकों में ट्रैफिक डायवर्जन
BRICS सम्मेलन के दौरान विदेशी मेहमानों और VVIP काफिलों की आवाजाही को देखते हुए दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने कई जगहों पर डायवर्जन लागू किए हैं। भारत मंडपम के आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा के कारण आम वाहनों की आवाजाही पर भी असर पड़ सकता है।
दिल्ली में रहने वाले लोगों को सलाह दी गई है कि वे जरूरी होने पर ही प्रभावित इलाकों की तरफ जाएं और यात्रा से पहले ट्रैफिक एडवाइजरी जरूर देख लें। एयरपोर्ट जाने वाले यात्रियों को भी अतिरिक्त समय लेकर निकलने की सलाह दी गई है।

BRICS अब केवल कुछ देशों का आर्थिक समूह नहीं रह गया है। इसके विस्तार के बाद संगठन में 11 देश शामिल हैं और यह दुनिया की बड़ी आबादी तथा वैश्विक अर्थव्यवस्था के महत्वपूर्ण हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है। भारत के लिए यह सम्मेलन अपनी कूटनीतिक और आर्थिक भूमिका को मजबूत करने का एक महत्वपूर्ण अवसर माना जा रहा है।
भारत इस मंच के जरिए अलग-अलग देशों के साथ व्यापार, निवेश, तकनीक और वित्तीय सहयोग बढ़ाने पर जोर दे सकता है। साथ ही, बदलती वैश्विक परिस्थितियों में भारत की संतुलित विदेश नीति भी सम्मेलन के दौरान महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
तेल की कीमतों और रुपये पर भी दबाव
BRICS सम्मेलन के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर भी बाजार की नजर बनी हुई है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है। इससे भारतीय रुपये पर दबाव बढ़ा है। Reuters के अनुसार, 11 सितंबर को रुपये में कमजोरी के बीच भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप किए जाने की संभावना जताई गई है।
तेल की ऊंची कीमतें भारत के लिए महत्वपूर्ण हैं क्योंकि देश अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है। यदि लंबे समय तक तेल महंगा रहता है, तो इसका असर आयात बिल, महंगाई और रुपये पर पड़ सकता है।
शेयर बाजार में भी गिरावट
वैश्विक तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का असर भारतीय शेयर बाजार पर भी दिखाई दिया। शुक्रवार को सेंसेक्स और निफ्टी में गिरावट दर्ज की गई। Reuters के मुताबिक, निफ्टी 50 करीब 0.92 प्रतिशत गिरकर 23,261.7 के स्तर पर रहा, जबकि सेंसेक्स 0.84 प्रतिशत की गिरावट के साथ 74,272.61 पर बंद हुआ।
बाजार में निवेशकों की चिंता का एक प्रमुख कारण तेल की कीमतों के साथ-साथ वैश्विक ब्याज दरों और भू-राजनीतिक तनाव को माना जा रहा है।
REPORTING ; MOTI JANGID

