कोटा: जापान में होने वाले एशियन गेम्स से ठीक पहले भारतीय वुशु टीम में हुए बदलाव ने एक खिलाड़ी को बेहद भावुक कर दिया। राजस्थान के कोटा की वुशु खिलाड़ी दिव्यांशी चौधरी को पहले भारतीय टीम का हिस्सा बनाया गया था, लेकिन बाद में उनका नाम टीम से हटा दिया गया। इसके बाद दिव्यांशी का एक भावुक वीडियो सामने आया, जिसमें उन्होंने फेडरेशन और चयन प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल उठाए।

वीडियो में दिव्यांशी काफी भावुक नजर आईं। उन्होंने अपने माता-पिता से माफी मांगी और कहा कि यह उनका आखिरी वीडियो हो सकता है। उन्होंने सुसा*ड की बात भी कही। इस वीडियो के सामने आने के बाद खेल जगत में भी इस मामले को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
एशियन गेम्स टीम से आखिरी समय में नाम हटाने का दावा
जानकारी के अनुसार, 2026 एशियन गेम्स के लिए भारतीय वुशु टीम की घोषणा पहले ही की जा चुकी थी। दिव्यांशी चौधरी भी इस टीम में शामिल थीं। हालांकि, 11 सितंबर को टीम में बदलाव की जानकारी सामने आई और दिव्यांशी की जगह नाओरेम रोशिबीना देवी को शामिल किया गया।
दिव्यांशी का कहना है कि उन्हें एशियन गेम्स के लिए भारतीय टीम की जर्सी भी मिल चुकी थी और वह प्रतियोगिता की तैयारी कर रही थीं। ऐसे में आखिरी समय पर टीम से बाहर किए जाने से उन्हें बड़ा झटका लगा।
वीडियो में रोते हुए रखी अपनी बात
दिव्यांशी ने करीब नौ मिनट के वीडियो में अपनी स्थिति के बारे में बात की। उन्होंने दावा किया कि उनके साथ सही व्यवहार नहीं हुआ और चयन प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए।
वीडियो के आखिरी हिस्से में वह अपने माता-पिता से माफी मांगती नजर आईं। उन्होंने कहा कि उन्होंने कभी ऐसा कदम उठाने के बारे में नहीं सोचा था, लेकिन मौजूदा परिस्थिति से वह बेहद परेशान हैं। इसके बाद उन्होंने कैमरा घर की छत की ओर कर दिया और इसे अपना आखिरी वीडियो बताया।इस तरह के बयान को लेकर मामला बेहद संवेदनशील हो गया है। दिव्यांशी की मानसिक स्थिति और उनकी सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई जा रही है।

दिव्यांशी को टीम से हटाने को लेकर वुशु एसोसिएशन ऑफ इंडिया की ओर से चोट का हवाला दिया गया है। एसोसिएशन के अध्यक्ष जितेंद्र सिंह के मुताबिक, दिव्यांशी पूरी तरह फिट नहीं थीं और स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया की मेडिकल रिपोर्ट में भी उनकी फिटनेस को लेकर समस्या बताई गई थी। उनका कहना है कि एशियन गेम्स जैसे बड़े टूर्नामेंट में अनफिट खिलाड़ी को भेजना उचित नहीं होगा।
वहीं दिव्यांशी का दावा है कि उन्होंने अपनी चोट का इलाज कराया था और डॉक्टर ने उन्हें आवश्यक सावधानियों के साथ खेलने की अनुमति दी थी। उनका कहना है कि उनकी मेडिकल रिपोर्ट भी कोच और फेडरेशन के पास मौजूद थी।यानी इस पूरे मामले में खिलाड़ी और फेडरेशन की ओर से अलग-अलग दावे सामने आए हैं।
ट्रायल में बेहतर प्रदर्शन का भी दावा
दिव्यांशी ने यह भी दावा किया कि जून में हुए एशियन गेम्स के फाइनल चयन ट्रायल में उन्होंने 60 किलोग्राम वर्ग में रोशिबीना देवी को हराया था। उनके अनुसार, ट्रायल में बेहतर प्रदर्शन करने के बावजूद उनका नाम टीम से हटा दिया गया।दिव्यांशी के पिता सुनील कुमार सुंडा ने भी दावा किया कि उनकी बेटी चयन ट्रायल में पहले स्थान पर रही थी और इसके बाद कई महीनों तक भारतीय वुशु टीम के कैंप में तैयारी करती रही।
हालांकि, फेडरेशन की ओर से उनकी फिटनेस को टीम से बाहर किए जाने का प्रमुख कारण बताया गया है। इसलिए अब इस मामले में चयन प्रक्रिया और मेडिकल रिपोर्ट को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

दिव्यांशी चौधरी 60 किलोग्राम वर्ग में सांदा स्पर्धा में हिस्सा लेती हैं। वह इससे पहले भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उन्होंने 2024 जूनियर वर्ल्ड वुशु चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीता था। इसके अलावा 2026 में चीन में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय वुशु प्रतियोगिता में भी उन्होंने रजत पदक हासिल किया।
बताया जाता है कि दिव्यांशी वर्ष 2017 से कोटा की महाबली स्पोर्ट्स एकेडमी में प्रशिक्षण ले रही हैं और राजस्थान के लिए अलग-अलग प्रतियोगिताओं में कई पदक जीत चुकी हैं।
एशियन गेम्स से पहले बढ़ा विवाद
2026 एशियन गेम्स का आयोजन जापान के आइची-नागोया में 19 सितंबर से 4 अक्टूबर तक होना है। वुशु प्रतियोगिताएं 20 से 24 सितंबर के बीच प्रस्तावित हैं। ऐसे समय में भारतीय टीम से जुड़े इस विवाद ने चयन प्रक्रिया पर बहस को जन्म दे दिया है।
फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण पहलू दिव्यांशी की सुरक्षा और मानसिक स्थिति है। खेल में चयन या बाहर होना किसी भी खिलाड़ी के लिए बेहद भावनात्मक और कठिन परिस्थिति हो सकती है, लेकिन ऐसी स्थिति में खिलाड़ी को अकेला नहीं छोड़ा जाना चाहिए। परिवार, कोच, खेल अधिकारी और संबंधित संस्थाओं की जिम्मेदारी है कि वे खिलाड़ी को तत्काल भावनात्मक सहयोग और आवश्यक मदद उपलब्ध कराएं।
REPORTING;MOTI JANGID

