खेत में 5 लाख रुपए दबाकर भूल गया किसान, जुताई के दौरान फिर मिली रकम; दीमक ने नोटों को कर दिया खराब
बालोतरा। चोरों से बचाने के लिए खेत की मिट्टी में छिपाकर रखी गई करीब पांच लाख रुपए की रकम किसान को वापस तो मिल गई, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। बालोतरा जिले के पचपदरा क्षेत्र में खेत की जुताई के दौरान मिट्टी के नीचे दबाई गई एक पॉलीथिन की थैली अचानक सामने आई। थैली खोलने पर उसमें रखे नोटों की हालत देखकर किसान के होश उड़ गए। बड़ी मात्रा में नोटों को दीमक चट कर चुकी थी और कई नोट गलकर छोटे-छोटे टुकड़ों में बदल गए थे।प्लॉट बेचकर मिली थी करीब पांच लाख की रकमजानकारी के अनुसार किसान मांगीलाल मेघवाल को प्लॉट बेचने से करीब पांच लाख रुपए की राशि मिली थी। किसान ने रकम को बैंक में रखने के बजाय चोरों से सुरक्षित रखने के लिए खेत में छिपाने का फैसला किया। उसने रुपए पॉलीथिन की थैली में रखकर मिट्टी के नीचे दबा दिए।
कुछ समय बाद किसान उस स्थान को भूल गया। काफी तलाश करने के बावजूद उसे वह जगह याद नहीं आई, जहां उसने रकम छिपाई थी। इसके बाद रुपए लंबे समय तक मिट्टी के नीचे ही दबे रहे।
बारिश के बाद जुताई में सामने आई थैली – बारिश के मौसम में खेत की जुताई के दौरान मिट्टी के अंदर दबाई गई वही थैली अचानक सामने आ गई। थैली दिखाई देने पर किसान को उम्मीद जगी कि उसकी सुरक्षित रखी रकम वापस मिल जाएगी। लेकिन थैली खोलते ही स्थिति देखकर वह हैरान रह गया।
थैली में रखी रकम का बड़ा हिस्सा दीमक के कारण खराब हो चुका था। कई नोट पूरी तरह गल गए थे, जबकि कुछ नोटों के केवल छोटे-छोटे टुकड़े ही बचे थे।
लाखों की रकम में से बचा काफी कम हिस्सा – घटना के बाद खेत में खराब हो चुके नोटों के टुकड़ों और करेंसी की तस्वीरें भी सामने आई हैं। बताया जा रहा है कि किसान ने जिस रकम को चोरी से बचाने के लिए खेत में छिपाया था, उसका करीब तीन-चौथाई हिस्सा उसके हाथ में आने से पहले ही खराब हो चुका था।
किसान के लिए यह रकम मिलने की खुशी से ज्यादा नुकसान का कारण बन गई। मेहनत और जमीन के सौदे से जुटाई गई राशि को सुरक्षित रखने की कोशिश आखिरकार उसके लिए भारी पड़ गई।बैंक में रखने के बजाय खेत में छिपाई थी रकम – किसान के मुताबिक, उसने रकम को चोरों से बचाने के उद्देश्य से बैंक के बजाय खेत में छिपाकर रखा था। इसके लिए पॉलीथिन की थैली में नोट भरकर उन्हें मिट्टी के नीचे दबा दिया गया था। बाद में वह उस जगह को भूल गया और काफी तलाश करने के बावजूद रकम नहीं मिल सकी।बारिश के बाद खेत की जुताई के दौरान जब वही स्थान सामने आया तो किसान को दबाई गई रकम मिल गई, लेकिन तब तक नोटों को काफी नुकसान हो चुका था।



