बाड़मेर: शिव विधानसभा क्षेत्र से निर्दलीय विधायक रविंद्र सिंह भाटी शुक्रवार, 25 सितंबर से पांच दिवसीय ‘सरलीकरण यात्रा’ की शुरुआत करने जा रहे हैं। अनंत चतुर्दशी के अवसर पर शुरू होने वाली यह यात्रा बाड़मेर के आलोक आश्रम से प्रारंभ होकर जोधपुर तक जाएगी। यात्रा के दौरान आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग यानी EWS के राजनीतिक प्रतिनिधित्व समेत इससे जुड़े विभिन्न मुद्दों को उठाया जाएगा।
रविंद्र सिंह भाटी की 5 दिवसीय यात्रा आज से शुरू, EWS के राजनीतिक प्रतिनिधित्व का मुद्दा उठाएंगे!

रविंद्र सिंह भाटी की इस यात्रा को राजस्थान की राजनीति में एक महत्वपूर्ण पहल के तौर पर देखा जा रहा है। यात्रा का मुख्य उद्देश्य EWS वर्ग के लिए राजनीतिक प्रतिनिधित्व की मांग को लेकर जनसंवाद और जागरूकता बढ़ाना बताया गया है। खासतौर पर पंचायत राज व्यवस्था में आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को राजनीतिक स्तर पर प्रतिनिधित्व दिए जाने का मुद्दा यात्रा के केंद्र में रहेगा।
बाड़मेर से जोधपुर तक चलेगी यात्रा
जानकारी के अनुसार पांच दिवसीय यात्रा की शुरुआत बाड़मेर स्थित आलोक आश्रम से होगी। इसके बाद यात्रा पश्चिमी राजस्थान के अलग-अलग क्षेत्रों से गुजरते हुए जोधपुर पहुंचेगी। इस दौरान भाटी स्थानीय लोगों और युवाओं से संवाद करेंगे तथा EWS से जुड़े मुद्दों पर अपनी बात रखेंगे।
भाटी का कहना है कि आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को केवल शिक्षा और सरकारी नौकरियों में अवसर देने तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए, बल्कि उन्हें राजनीतिक प्रतिनिधित्व के अवसर भी मिलने चाहिए। उनका तर्क है कि चुनाव लड़ने में होने वाला खर्च आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।
EWS राजनीतिक प्रतिनिधित्व की मांग
इस यात्रा के जरिए भाटी EWS वर्ग के लिए राजनीतिक प्रतिनिधित्व की मांग को प्रमुखता से उठाने जा रहे हैं। उनका कहना है कि वर्तमान राजनीतिक व्यवस्था में आर्थिक संसाधनों की भूमिका काफी महत्वपूर्ण हो गई है। ऐसे में आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लोगों के लिए चुनावी राजनीति में आगे आना मुश्किल हो सकता है।
भाटी के अनुसार, जहां सीटें सामान्य वर्ग के लिए होती हैं, वहां भी आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के सामने चुनाव लड़ने के लिए पर्याप्त संसाधनों की चुनौती बनी रहती है। इसी मुद्दे को लेकर वह यात्रा के दौरान लोगों के बीच संवाद करेंगे और अपनी मांग को व्यापक स्तर पर रखने का प्रयास करेंगे।

EWS नियमों में बदलाव की भी मांग
यात्रा के दौरान EWS पात्रता से जुड़े नियमों का मुद्दा भी उठाया जाएगा। भाटी ने EWS के लिए केंद्र और राज्यों में लागू अलग-अलग मानकों पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि देश के अलग-अलग क्षेत्रों की आर्थिक और भौगोलिक परिस्थितियां एक जैसी नहीं हैं, इसलिए पात्रता तय करते समय स्थानीय परिस्थितियों को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।
विशेष रूप से पश्चिमी राजस्थान के बाड़मेर और जैसलमेर जैसे रेगिस्तानी इलाकों का उदाहरण देते हुए भाटी ने कृषि भूमि से जुड़े मानकों पर पुनर्विचार की बात कही है। उनका तर्क है कि जमीन का क्षेत्रफल समान होने के बावजूद उसकी उत्पादकता, सिंचाई की सुविधा और आर्थिक उपयोगिता अलग-अलग क्षेत्रों में काफी अलग हो सकती है।
सोशल मीडिया पर भी सक्रिय हैं भाटी
रविंद्र सिंह भाटी पश्चिमी राजस्थान के युवा नेताओं में शामिल हैं और सोशल मीडिया पर भी उनकी मजबूत मौजूदगी है। वह शिव विधानसभा क्षेत्र से निर्दलीय विधायक हैं। 2023 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर जीत दर्ज की थी। इसके बाद 2024 के लोकसभा चुनाव में भी उन्होंने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ा और बड़ी संख्या में वोट हासिल किए।
अब पांच दिवसीय सरलीकरण यात्रा के जरिए EWS के राजनीतिक प्रतिनिधित्व और उससे जुड़े नियमों का मुद्दा पश्चिमी राजस्थान से आगे व्यापक स्तर पर उठाने की कोशिश की जा रही है।
पंचायत चुनावों से पहले चर्चा में आया मुद्दा
राजस्थान में पंचायत चुनावों की तैयारियों के बीच EWS के राजनीतिक प्रतिनिधित्व का मुद्दा उठना राजनीतिक रूप से चर्चा का विषय बन गया है। हालांकि यात्रा का घोषित उद्देश्य EWS वर्ग से जुड़े मुद्दों को सामने रखना है, लेकिन इसका असर राज्य की राजनीतिक चर्चा पर भी पड़ सकता है।
पांच दिनों तक चलने वाली इस यात्रा के दौरान भाटी अलग-अलग स्थानों पर लोगों से संपर्क करेंगे और EWS से जुड़े विषयों पर अपनी बात रखेंगे। यात्रा के जोधपुर पहुंचने के साथ इसका समापन होगा।
अब देखना होगा कि इस यात्रा के दौरान EWS राजनीतिक प्रतिनिधित्व को लेकर उठाई जाने वाली मांगों पर राजस्थान में राजनीतिक दलों और आम लोगों की ओर से किस तरह की प्रतिक्रिया सामने आती है।
REPORTING ; MOTI JANGID

