MDA सीलिंग और बिजली संकट पर अफसरशाही पर उठे सवाल
मुजफ्फरनगर: मंत्री कपिल देव अग्रवाल के निर्देश भी नहीं मान रहे अधिकारी?
MDA सीलिंग कार्रवाई और बिजली संकट से जनता परेशानमुजफ्फरनगर |
27 जून 2026 उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में प्रशासनिक कार्यशैली और अफसरशाही को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है।
शुक्रवार को शहर में दो बड़े मुद्दों—एमडीए की सीलिंग कार्रवाई और लगातार बिजली कटौती—ने आम जनता व व्यापारियों की परेशानियां बढ़ा दीं।
इस पूरे मामले में खास बात यह रही कि प्रदेश सरकार के राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिल देव अग्रवाल दिनभर अधिकारियों से संपर्क कर हालात सुधारने का प्रयास करते रहे, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति में कोई खास बदलाव देखने को नहीं मिला।
यूनिक प्लाजा में सीलिंग कार्रवाई पर भड़के व्यापारी रुड़की रोड स्थित यूनिक प्लाजा मार्केट में एमडीए की टीम द्वारा की गई सीलिंग कार्रवाई के विरोध में व्यापारियों ने जोरदार प्रदर्शन किया।
व्यापारियों का आरोप है कि कार्रवाई के दौरान मंत्री कपिल देव अग्रवाल की अधिकारियों से फोन पर बात भी कराई गई, लेकिन इसके बावजूद सीलिंग प्रक्रिया नहीं रोकी गई।
व्यापारी नेताओं का कहना है कि यदि भवन में किसी प्रकार की तकनीकी या मानचित्र संबंधी कमी थी, तो उन्हें सुधार के लिए पर्याप्त समय दिया जाना चाहिए था।
बिना उचित अवसर दिए दुकानों को सील करना व्यापारियों के साथ अन्याय है।
आंदोलन की चेतावनी, सरकार की छवि पर असर का दावाव्यापारिक संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो वे शहर में कटोरा लेकर भीख मांगने जैसे प्रतीकात्मक आंदोलन शुरू करेंगे।
उनका कहना है कि अधिकारियों की कार्यशैली से सरकार की छवि प्रभावित हो रही है और व्यापारी वर्ग में असंतोष बढ़ रहा है।
बिजली संकट से बेहाल शहर, मंत्री ने खुद संभाला मोर्चादूसरी ओर भीषण गर्मी और उमस के बीच शहर के कई इलाकों में घंटों बिजली आपूर्ति बाधित रही।
रामपुरी, नई मंडी, गांधी कॉलोनी और रामलीला टिल्ला समेत कई क्षेत्रों के लोग बिजली कटौती से परेशान रहे।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए राज्यमंत्री कपिल देव अग्रवाल स्वयं शिव चौक पहुंचे और वहीं से विद्युत विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को लगातार फोन कर बिजली आपूर्ति बहाल कराने के निर्देश दिए।
हालांकि स्थानीय लोगों का आरोप है कि देर रात तक समस्या का पूर्ण समाधान नहीं हो सका।
जनता के बीच उठ रहे बड़े सवालएक ही दिन में सामने आए इन दोनों मामलों के बाद शहर में अफसरशाही की कार्यप्रणाली को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
व्यापारियों और आम नागरिकों का कहना है कि जब एक मंत्री के निर्देशों पर भी तत्काल कार्रवाई नहीं हो रही, तो आम लोगों की शिकायतों का समाधान किस प्रकार होगा।
स्थानीय लोगों ने मुख्यमंत्री कार्यालय से हस्तक्षेप की मांग करते हुए प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने तथा जनहित से जुड़े मामलों में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने की अपील की है।


