अमेरिका-ईरान सीजफायर पर 24 घंटे में सवाल, पाकिस्तान की मध्यस्थता पर उठे गंभीर संदेह ! America-iran or pakistan
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अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में घोषित सीजफायर को लेकर 24 घंटे भी पूरे नहीं हुए थे कि हालात फिर से बिगड़ते नजर आने लगे हैं।
खाड़ी क्षेत्र में तनाव कम होने के बजाय और बढ़ गया है।
इस बीच पाकिस्तान की मध्यस्थता पर भी सवाल उठने लगे हैं, जिससे पूरे घटनाक्रम ने नया मोड़ ले लिया है।
दरअसल, सीजफायर के तुरंत बाद ही इजरायल ने लेबनान पर बड़े सैन्य हमले किए। इन हमलों के बाद ईरान ने कड़ी प्रतिक्रिया दी।
ईरान की सेना की अहम शाखा, इस्लामिक रिवोल्युशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से जहाजों की आवाजाही पर रोक लगाने का ऐलान कर दिया।
ईरान का आरोप है कि इजरायल ने सीजफायर का उल्लंघन किया है और क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ाई है।
होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद अहम मार्ग है।
यहां से दुनिया का बड़ा हिस्सा तेल निर्यात होता है। ऐसे में ईरान द्वारा यहां आवाजाही रोकने की चेतावनी ने अंतरराष्ट्रीय बाजारों और देशों की चिंता बढ़ा दी है।
यदि यह मार्ग बंद होता है, तो इसका सीधा असर वैश्विक अर्थव्यवस्था और तेल की कीमतों पर पड़ेगा।
इस बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी सख्त रुख अपनाया है।
उन्होंने अपने एक बयान में स्पष्ट कहा कि यदि पूर्ण समझौता नहीं हुआ, तो अमेरिकी हमले और तेज किए जाएंगे।
ट्रंप ने यह भी कहा कि जब तक व्यापक समझौता नहीं हो जाता, तब तक अमेरिकी सैनिक और युद्धपोत खाड़ी क्षेत्र में तैनात रहेंगे।
उन्होंने यह भरोसा भी दिलाया कि अमेरिका हर हाल में होर्मुज जलडमरूमध्य को खुला और सुरक्षित रखेगा।पूरे घटनाक्रम में पाकिस्तान की भूमिका सबसे ज्यादा चर्चा में है।
सीजफायर के पीछे पाकिस्तान की मध्यस्थता को लेकर शुरू में दावे किए गए थे, लेकिन अब वही दावे संदेह के घेरे में आ गए हैं।
इजरायल ने साफ शब्दों में कहा है कि पाकिस्तान एक विश्वसनीय मध्यस्थ नहीं है।
इस बयान के बाद पाकिस्तान की कूटनीतिक स्थिति पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।
वहीं, भारत में मौजूद ईरानी प्रतिनिधि ने भी अप्रत्यक्ष रूप से पाकिस्तान से दूरी बनाते हुए भारत की तारीफ की है।
उन्होंने भारत और भारतीयों को “बहुत अच्छा” बताया, लेकिन पाकिस्तान का नाम लेने से बचते नजर आए।
इससे यह संकेत मिलता है कि ईरान भी पाकिस्तान की भूमिका को लेकर पूरी तरह आश्वस्त नहीं है।
अंतरराष्ट्रीय मामलों के विशेषज्ञों का भी मानना है कि पाकिस्तान की मध्यस्थता में पारदर्शिता की कमी रही है।
उनका कहना है कि इतनी संवेदनशील स्थिति में किसी भी देश की भूमिका स्पष्ट और विश्वसनीय होनी चाहिए, जो इस मामले में नजर नहीं आई।
कुल मिलाकर, अमेरिका-ईरान के बीच सीजफायर की स्थिति बेहद नाजुक बनी हुई है।
इजरायल के हमलों, ईरान की कड़ी प्रतिक्रिया और अमेरिका के सख्त रुख ने खाड़ी क्षेत्र को एक बार फिर युद्ध के मुहाने पर ला खड़ा किया है।
आने वाले दिनों में यह देखना बेहद महत्वपूर्ण होगा कि क्या कूटनीतिक प्रयास सफल होते हैं या फिर स्थिति और ज्यादा गंभीर हो जाती है।