अजमेर | 4 सितंबर 2026
एक शादी समारोह में जूठन खाते हुए एक मासूम बच्चे को देखकर शिक्षक सुनील जोस का दिल द्रवित हो गया। उसी पल उन्होंने संकल्प लिया कि आर्थिक तंगी के कारण शिक्षा से वंचित बच्चों को पढ़ाकर उनके जीवन में बदलाव लाएंगे। आज उनका यह संकल्प एक बड़े अभियान का रूप ले चुका है, जिसके जरिए सैकड़ों जरूरतमंद बच्चे शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं और कई डॉक्टर, इंजीनियर व टेक्नोक्रेट बन चुके हैं।

पुरानी बस को बनाया चलता-फिरता स्कूल
गरीब बच्चों तक शिक्षा पहुंचाने के उद्देश्य से सुनील जोस ने करीब तीन लाख रुपये खर्च कर एक पुरानी बस खरीदी और उसे मोबाइल क्लासरूम में बदल दिया। यह बस झुग्गी-झोंपड़ियों और उन बस्तियों तक पहुंचती है, जहां बच्चे आर्थिक अभाव के कारण नियमित स्कूल नहीं जा पाते।
तीन बच्चों से शुरू हुई मुहिम, आज 900 से अधिक छात्र जुड़े
सुनील जोस ने शुरुआत कालबेलिया, भोपा और नाथ समाज के केवल तीन बच्चों को नि:शुल्क पढ़ाने से की थी। धीरे-धीरे लोगों का सहयोग मिलता गया और आज करीब 900 बच्चे इस अभियान का हिस्सा बन चुके हैं। वे अपनी टीम के साथ कोटड़ा, पंचशील और अन्य क्षेत्रों में नियमित रूप से बच्चों को शिक्षा प्रदान कर रहे हैं।
कई बच्चों ने IIT और मेडिकल कॉलेज में बनाई जगह
उनके मार्गदर्शन में पढ़ने वाले कई छात्र आज IIT और मेडिकल कॉलेजों तक पहुंच चुके हैं। वहीं, एक प्रतिष्ठित कोचिंग संस्थान उनके माध्यम से चयनित करीब 190 बच्चों को नि:शुल्क प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी भी करवा रहा है।
पढ़ाई के साथ भोजन की भी व्यवस्था
सुनील जोस का मानना है कि भूख शिक्षा की सबसे बड़ी बाधा है। इसी सोच के साथ दानदाताओं के सहयोग से जरूरतमंद बच्चों को दोनों समय भोजन भी उपलब्ध कराया जाता है, ताकि वे बिना किसी चिंता के अपनी पढ़ाई जारी रख सकें।
लक्ष्य—हर बच्चे को मिले बेहतर भविष्य
सुनील जोस का कहना है कि उनका उद्देश्य केवल बच्चों को पढ़ाना नहीं, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर और जिम्मेदार नागरिक बनाना है। उनका विश्वास है कि सही अवसर और मार्गदर्शन मिलने पर हर बच्चा अपनी प्रतिभा के दम पर बड़ी सफलता हासिल कर सकता है।
अब मॉडल स्कूल बनाने की तैयारी
मोबाइल स्कूल की सफलता के बाद अब सुनील जोस गरीब और वंचित बच्चों के लिए एक आधुनिक मॉडल स्कूल स्थापित करना चाहते हैं। उनका सपना है कि हर जरूरतमंद बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बेहतर माहौल मिले, ताकि वह अपने सपनों को साकार कर सके।एक शिक्षक का यह समर्पण आज हजारों लोगों के लिए प्रेरणा बन चुका है और यह साबित करता है कि शिक्षा समाज में सबसे बड़ा बदलाव ला सकती है।
रिपोर्टिंग – विरेन्द्र

