राजस्थान में 4 दवाओं के सैंपल गुणवत्ता जांच में फेल पाए गए।
राजस्थान में 4 दवाओं के सैंपल फेल, बिक्री और उपयोग पर तत्काल रोक
जयपुर: राजस्थान में दवा सुरक्षा को लेकर राज्य औषधि नियंत्रण विभाग ने बड़ा कदम उठाया है।
विभाग की गुणवत्ता जांच में चार दवाओं के सैंपल मानकों पर खरे नहीं उतरने के बाद इनके उपयोग, वितरण और बिक्री पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है।
संबंधित बैचों को बाजार से वापस लेने के निर्देश जारी किए गए हैं।विभाग के अनुसार जिन दवाओं के नमूने जांच में असफल पाए गए हैं, उनमें एंटीसेप्टिक, एंटीबायोटिक, दर्द निवारक और पशुओं के उपचार में इस्तेमाल होने वाली दवाएं शामिल हैं।
अस्पतालों, मेडिकल स्टोरों और स्वास्थ्य संस्थानों को इन बैचों का उपयोग नहीं करने के लिए कहा गया है।
इन दवाओं पर लगी रोक 1. पोविडोन आयोडीन सॉल्यूशन- टीआर नंबर: 1074/2026-2027/डीटीएल/2026- उपयोग: घावों और संक्रमण से बचाव के लिए एंटीसेप्टिक दवा।
2. थायमिन, राइबोफ्लेविन, नियासिनमाइड, सायनोकोबालामिन एवं लीवर क्रूड (लिवग्रो)- टीआर नंबर: 1075/2026-2027/डीटीएल/2026- उपयोग: पशुओं में विटामिन-बी कॉम्प्लेक्स की कमी दूर करने और लीवर सपोर्ट के लिए।
3. ओफ्लॉक्सासिन एवं ऑर्निडाजोल सिरप- बैच नंबर: SLG 25277- उपयोग: दस्त, पेचिश और आंतों के संक्रमण के उपचार में।
4. ड्रोटावेरिन हाइड्रोक्लोराइड एवं मेफेनैमिक एसिड टैबलेट- बैच नंबर: DMR-504- उपयोग: पेट दर्द, ऐंठन और मासिक धर्म के दर्द से राहत के लिए।
बाजार से वापस मंगाए जाएंगे प्रभावित बैचऔषधि नियंत्रण विभाग ने संबंधित दवा निर्माताओं और विक्रेताओं को निर्देश दिया है कि प्रभावित बैचों को तत्काल बाजार से वापस लिया जाए।
साथ ही मेडिकल स्टोर और अस्पतालों को चेतावनी दी गई है कि यदि उनके पास इन बैचों का स्टॉक उपलब्ध है तो उसका वितरण या उपयोग न किया जाए।
पहले भी कई दवाओं पर लग चुकी है रोकगौरतलब है कि इससे पहले भी राजस्थान में कई दवाओं के नमूने गुणवत्ता जांच में फेल पाए गए थे।
उस दौरान एलबेंडाजोल सिरप, हाइड्रोक्सीजिन टैबलेट, केटोकोनाजोल टैबलेट, मिनोक्सिडिल सॉल्यूशन, सालबूटामोल सिरप सहित 19 प्रकार की दवाओं की सप्लाई पर रोक लगाई गई थी।
अधिकारियों के अनुसार दवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने और मरीजों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह कार्रवाई की गई है।
विभाग लगातार बाजार में उपलब्ध दवाओं की निगरानी कर रहा है ताकि लोगों को सुरक्षित और मानक गुणवत्ता वाली दवाएं उपलब्ध हो सकें।


