
बाड़मेर: जिले से घरेलू तेल उत्पादन बढ़ाने से जुड़ी खबर सामने आई है. केयर्न के भारत की सबसे बड़ी तटवर्ती तेल खोज करने के बाद से जिले का मंगला क्षेत्र लगातार तेल उत्पादन कर रहा है| मंगला से तेल का उत्पादन 17 साल से हो रहा है| इससे यह क्षेत्र देश के तेल एवं गैस उद्योग के प्रमुख आधारों में शुमार है| मंगला घरेलू कच्चे तेल के उत्पादन में अहम योगदान देने के साथ कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता घटाने में लगा है| वेदांता ऑयल एंड गैस लिमिटेड (VOGL) इसमें दो हजार करोड़ रुपए निवेश की तैयारी में है|
तेल की रिकवरी दोगुनी करने का लक्ष्य:
देश की प्रमुख निजी तेल एवं गैस उत्पादक कंपनी वेदांता ऑयल एंड गैस लिमिटेड (VOGL) वित्त वर्ष 2026-27 में राजस्थान नॉर्थ क्षेत्र में करीब 200 मिलियन डॉलर यानी लगभग 2 हजार करोड़ का निवेश करने की योजना बना रही है| यह निवेश तेल की उन्नत रिकवरी, उत्पादन के अनुकूलन तथा संसाधनों को भंडार में परिवर्तित करने से जुड़ी परियोजनाओं को गति देने के लिए किया जाएगा| VOGL के अंतरिम मुख्य कार्यकारी अधिकारी जिम जॉनी गास्ट ने बताया कि भारत के तटीय तेल क्षेत्र की तस्वीर को नए सिरे से परिभाषित करने से लेकर घरेलू तेल उत्पादन के महत्वपूर्ण आधार बनने तक मंगला क्षेत्र देश की हाइड्रोकार्बन यात्रा का प्रमाण है| आज हमारा ध्यान इसके विकास के अगले चरण की संभावनाओं को सामने लाने पर है| उन्नत तकनीकों, लक्षित वर्कओवर, साइडट्रैक और वेल इंटरवेंशन के जरिए हमारा लक्ष्य तेल की रिकवरी को 30 प्रतिशत से बढ़ाकर 60 प्रतिशत करना है|
देश की ऊर्जा सुरक्षा को मिलेगी मजबूती:
अंतरिम सीईओ गास्ट ने कहा कि “हम मौजूदा भंडार से अतिरिक्त मूल्य हासिल करने के लिए अनुभवी भागीदारों के साथ अपरंपरागत संभावनाओं का मूल्यांकन कर रहे हैं| काफी संभावनाएं हैं| मंगला आने वाले दशकों तक सतत तेल उत्पादन को बढ़ावा देने तथा भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने में योगदान देता रहेगा|
570 मिलियन बैरल संभावित भंडार:
वर्ष 2004 में खोजा गया मंगला तेल क्षेत्र अब देश के सबसे अधिक उत्पादन करने वाले तटवर्ती हाइड्रोकार्बन क्षेत्रों में शामिल हो चुका है| मंगला, भाग्यम और ऐश्वर्या (MBA) समेत राजस्थान के तेल क्षेत्रों में करीब 570 मिलियन बैरल ऑयल इक्विवेलेंट (MMboe) संभावित भंडार होने का अनुमान है. केयर्न ने मंगला के विभिन्न कुआं क्षेत्रों में अल्कलाइन-सर्फेक्टेंट-पॉलिमर (ASP) इंजेक्शन की व्यावसायिक क्षमता का विस्तार किया है| यह तकनीक भंडार में मौजूद तेल की अतिरिक्त मात्रा को बाहर निकालने और तेल की रिकवरी बढ़ाने में मदद करती है|
टाइट ऑयल की संभावना:
राजस्थान के तेल क्षेत्र में करीब 100-200 मिलियन बैरल ऑयल इक्विवेलेंट (MMboe) टाइट ऑयल की संभावना का अनुमान है| इसके अलावा चल रही संसाधन से भंडार में परिवर्तन की परियोजनाओं के माध्यम से आने वाले वर्षों में करीब 200-300 MMboe अतिरिक्त संसाधनों को भंडार में शामिल किए जाने की उम्मीद है| इससे राजस्थान क्षेत्र के दीर्घकालिक विकास की संभावनाएं और मजबूत होगी|
रिपोर्टिंग: हरीश

