अजमेर: राजस्थान के अजमेर में नगर निकाय चुनाव के नतीजों ने स्थानीय राजनीति की तस्वीर बदल दी है। लंबे समय बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) को बड़ा झटका लगा है, जबकि कांग्रेस ने बढ़त बनाकर अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई है। चुनाव परिणामों के मुताबिक कुल 80 वार्डों में कांग्रेस ने 37 वार्डों में जीत हासिल की, जबकि भाजपा के खाते में 32 वार्ड आए हैं। वहीं 11 वार्डों में निर्दलीय प्रत्याशियों ने जीत दर्ज की है।

इन नतीजों के बाद अजमेर की स्थानीय सत्ता की चाबी अब निर्दलीय पार्षदों के हाथ में पहुंच गई है। कांग्रेस और भाजपा दोनों ही बहुमत के आंकड़े से दूर हैं, ऐसे में 11 निर्दलीय पार्षदों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो गई है। यही कारण है कि निर्दलीय पार्षदों को मौजूदा राजनीतिक समीकरण में ‘किंगमेकर’ माना जा रहा है।
36 साल बाद बदला राजनीतिक समीकरण
अजमेर में लंबे समय से भाजपा का स्थानीय निकाय की राजनीति में प्रभाव माना जाता रहा है। करीब 36 साल बाद आए इस चुनावी परिणाम ने भाजपा के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। इस बार कांग्रेस ने भाजपा से आगे निकलते हुए सबसे अधिक वार्डों पर कब्जा जमाया है।
80 सदस्यीय बोर्ड में बहुमत के लिए 41 पार्षदों का समर्थन जरूरी है। कांग्रेस 37 सीटों के साथ बहुमत से चार कदम दूर है, जबकि भाजपा 32 सीटों पर रुक गई है। ऐसे में किसी भी दल को बोर्ड बनाने के लिए निर्दलीय पार्षदों का समर्थन हासिल करना होगा।
11 निर्दलीय पार्षदों पर सबकी नजर
चुनाव परिणाम आने के बाद सबसे ज्यादा चर्चा उन 11 निर्दलीय पार्षदों की हो रही है, जिन्होंने दोनों प्रमुख दलों के बीच अंतर को निर्णायक बहुमत में बदलने से रोक दिया है।
यदि कांग्रेस को बोर्ड बनाना है तो उसे कम से कम चार निर्दलीय पार्षदों का समर्थन हासिल करना होगा। वहीं भाजपा को बहुमत तक पहुंचने के लिए कांग्रेस से अधिक संख्या में निर्दलीयों को अपने पक्ष में करना पड़ेगा।ऐसे में आने वाले दिनों में राजनीतिक दलों की नजर निर्दलीय पार्षदों पर रहेगी। समर्थन को लेकर बातचीत और स्थानीय स्तर पर राजनीतिक गतिविधियां तेज होने की संभावना है।

कांग्रेस के लिए बढ़ा उत्साह
कांग्रेस के लिए यह परिणाम महत्वपूर्ण माना जा रहा है। 37 वार्डों में जीत के साथ पार्टी सबसे बड़े दल के रूप में उभरी है। पार्टी कार्यकर्ताओं में नतीजों को लेकर उत्साह देखने को मिल रहा है।
हालांकि सबसे बड़ी पार्टी बनने के बावजूद कांग्रेस अपने दम पर बोर्ड बनाने की स्थिति में नहीं है। उसे निर्दलीय पार्षदों का समर्थन जुटाना होगा। इसलिए जीत के बाद अब कांग्रेस की अगली चुनौती बोर्ड के लिए आवश्यक समर्थन हासिल करना होगी।
भाजपा ने 32 वार्डों में जीत दर्ज की है, लेकिन यह संख्या बहुमत से काफी कम है। ऐसे में पार्टी के सामने बोर्ड गठन को लेकर चुनौती खड़ी हो गई है।भाजपा के लिए अब निर्दलीय पार्षदों का समर्थन महत्वपूर्ण होगा। यदि पार्टी पर्याप्त निर्दलीय पार्षदों को अपने साथ जोड़ने में सफल रहती है, तो वह सत्ता के समीकरण को अपने पक्ष में बदलने की कोशिश कर सकती है।

अब आगे क्या होगा?
अजमेर में चुनाव परिणाम के बाद असली राजनीतिक मुकाबला बोर्ड गठन को लेकर दिखाई दे सकता है। कांग्रेस के पास सबसे अधिक 37 पार्षद हैं, लेकिन बहुमत के लिए उसे कम से कम चार और पार्षदों की जरूरत है। दूसरी ओर भाजपा के पास 32 पार्षद हैं और उसे बहुमत तक पहुंचने के लिए कम से कम नौ अतिरिक्त पार्षदों का समर्थन चाहिए।
इसलिए आने वाले दिनों में 11 निर्दलीय पार्षदों के फैसले पर अजमेर की स्थानीय सत्ता का भविष्य काफी हद तक निर्भर करेगा। कौन-सा दल निर्दलीयों को अपने साथ जोड़ पाता है, यह तय करेगा कि अजमेर के नगर निकाय की कमान आखिर किसके हाथ में जाती है।
अजमेर चुनाव का गणित
- कुल वार्ड: 80
- कांग्रेस: 37
- भाजपा: 32
- निर्दलीय: 11
- बहुमत का आंकड़ा: 41
- कांग्रेस को बहुमत के लिए जरूरत: 4 और पार्षद
- भाजपा को बहुमत के लिए जरूरत: 9 और पार्षद
REPORTING ; MOTI JANGID

