Saniya Khanam: Gen Z आंदोलन से प्रेरित होकर 21 साल की उम्र में राजनीति में उतरीं सानिया खानम, जानें कौन हैं?
राजस्थान : भीलवाड़ा जिले की जहाजपुर नगर पालिका चुनाव इस बार एक युवा चेहरे की वजह से सुर्खियों में है। महज 21 साल की सानिया खानम ने वार्ड नंबर 6 से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर नामांकन दाखिल कर हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। कम उम्र में चुनावी मैदान में उतरने वाली सानिया का कहना है कि राजनीति में युवाओं की भागीदारी बढ़नी चाहिए, क्योंकि बदलाव की शुरुआत जिम्मेदारी निभाने से होती है।

Gen Z आंदोलन से मिली राजनीति में आने की प्रेरणा
सानिया खानम ने बताया कि दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए Gen Z आंदोलन ने उन्हें काफी प्रभावित किया। युवाओं की आवाज, उनके मुद्दे और बदलाव की सोच ने उन्हें राजनीति में कदम रखने का हौसला दिया।
सानिया के मुताबिक, यह चुनाव लड़ने का फैसला पूरी तरह उनका अपना था। उन्होंने जब अपने परिवार को इस बारे में बताया तो सबसे पहले उनके दादाजी ने उनका उत्साह बढ़ाया और पूरा समर्थन दिया।
परिवार का राजनीति से पुराना रिश्ता
सानिया खानम ऐसे परिवार से आती हैं, जिसका स्थानीय राजनीति से लंबे समय से जुड़ाव रहा है। उनके दादा नज़र मोहम्मद जहाजपुर नगर पालिका में लगातार आठ बार पार्षद रह चुके हैं। इस बार भी उन्होंने वार्ड नंबर 16 से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में नामांकन दाखिल किया है।इतना ही नहीं, सानिया की बुआ भी नगर पालिका चुनाव लड़ रही हैं। ऐसे में एक ही परिवार की दो पीढ़ियां इस चुनाव में अपनी किस्मत आजमा रही हैं।
शिक्षा और विकास को बताया प्राथमिकता
सानिया का कहना है कि यदि जनता उन्हें पार्षद चुनती है तो उनकी पहली प्राथमिकता वार्ड में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारना, बुनियादी सुविधाओं का विस्तार करना और विकास कार्यों को तेज़ करना होगा।उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव जीतने के बाद वे पूरी तरह स्वतंत्र रूप से काम करेंगी और जनता के हित में फैसले लेंगी।
सबसे युवा उम्मीदवार बनीं सानिया
जहाजपुर नगर पालिका चुनाव के पहले दिन कुल सात उम्मीदवारों ने नामांकन दाखिल किया। इनमें 21 वर्षीय सानिया खानम सबसे कम उम्र की उम्मीदवार हैं। उनकी उम्मीदवारी को स्थानीय राजनीति में युवाओं की बढ़ती भागीदारी के रूप में देखा जा रहा है।
कम उम्र में चुनावी मैदान में उतरकर सानिया खानम ने यह संदेश दिया है कि नई पीढ़ी अब सिर्फ बदलाव की बात नहीं करना चाहती, बल्कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा बनकर उसे जमीन पर भी उतारना चाहती है।
रिपोर्टिंग – विरेन्द्र

