24 घंटे में रिटायर हुआ शिक्षक, नौकरी मिली तो छिन गई खुशी
नई दिल्ली: झारखंड में शिक्षकों की नियुक्ति से जुड़ा एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। राज्य में 26 हजार शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया के तहत मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने 29 जून को रांची स्थित टाना भगत इंडोर स्टेडियम में 1,042 चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र सौंपे। जहां अधिकांश अभ्यर्थियों के चेहरे पर वर्षों की मेहनत के बाद नौकरी मिलने की खुशी दिखाई दी, वहीं कुछ शिक्षक ऐसे भी थे जिनकी खुशियां नियुक्ति प्रक्रिया में हुई देरी के कारण अधूरी रह गईं। नियुक्ति पत्र मिला, लेकिन खुशी नहीं – कार्यक्रम में मौजूद कई शिक्षकों को नियुक्ति पत्र तो मिला, लेकिन उनके चेहरों पर खुशी के बजाय मायूसी साफ दिखाई दी। इसकी वजह यह रही कि लंबे समय तक भर्ती प्रक्रिया अटकी रहने के कारण कुछ अभ्यर्थी सेवानिवृत्ति की उम्र तक पहुंच चुके हैं। ऐसे में सरकारी शिक्षक बनने का सपना पूरा होने के बावजूद वे नौकरी का लाभ नहीं उठा पाएंगे।
एक महीने पहले हो चुके थे रिटायर – पलामू जिले के नियूम अंसारी भी उन चयनित शिक्षकों में शामिल हैं जिन्हें 29 जून को नियुक्ति पत्र मिला। हालांकि उनकी उम्र 31 मई 2026 को 60 वर्ष पूरी हो चुकी थी, जो सरकारी सेवा से सेवानिवृत्ति की निर्धारित आयु है। ऐसे में नियुक्ति पत्र मिलने के बावजूद वे स्कूल में सेवा नहीं दे सकेंगे और उन्हें वेतन का लाभ भी नहीं मिलेगा। नियूम अंसारी का कहना है कि उन्होंने भर्ती प्रक्रिया पूरी की और चयनित भी हुए, लेकिन नियुक्ति में हुई देरी के कारण उनका पूरा संघर्ष व्यर्थ होता दिखाई दे रहा है। उन्होंने राज्य सरकार से इस मामले में समाधान निकालने की मांग की है।
नौकरी मिली और अगले दिन हो गए रिटायर – जामताड़ा के नंदलाल रवानी की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। उन्हें 29 जून को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के हाथों नियुक्ति पत्र मिला, लेकिन 30 जून को 60 वर्ष की आयु पूरी होने के साथ ही वे सेवानिवृत्त हो गए। नंदलाल रवानी ने बताया कि उन्होंने वर्ष 2016 में झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (JTET) पास की थी। इसके बाद वे वर्षों तक भर्ती प्रक्रिया शुरू होने का इंतजार करते रहे। वर्ष 2023 में सहायक आचार्य भर्ती प्रक्रिया शुरू हुई, लेकिन प्रशासनिक और कानूनी कारणों से नियुक्ति में लगातार देरी होती रही। परिणामस्वरूप नियुक्ति पत्र मिलने के महज एक दिन बाद ही उन्हें रिटायर होना पड़ा।
भर्ती प्रक्रिया की देरी पर उठे सवाल – इस पूरे मामले ने झारखंड की शिक्षक भर्ती प्रक्रिया पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। वर्षों तक भर्ती प्रक्रिया लंबित रहने के कारण कई अभ्यर्थियों को नौकरी मिलने के बावजूद उसका लाभ नहीं मिल पाया। अब प्रभावित शिक्षक सरकार से विशेष राहत और उचित समाधान की मांग कर रहे हैं, ताकि उनकी वर्षों की मेहनत और चयन व्यर्थ न जाए।
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